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“बिल्डर के खिलाफ घर–मालिकों का उभरता संग्राम — दिल्ली में नागरिक आंदोलन की आधिकारिक घोषणा”

By विनय मिश्रा नई दिल्ली: दिनांक 20 नवंबर 2025, को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि 26 अक्टूबर 2025 को कुछ परिवारों द्वारा शुरू किया गया छोटा विरोध प्रदर्शन अब एक संगठित नागरिक आंदोलन का स्वरूप ले चुका है। देशभर में उन घर–मालिकों का गुस्सा और पीड़ा सामने आ रही है जिन्हें बिल्डर्स के कथित शोषण, देरी, अधूरे निर्माण, और मनमानी के कारण मानसिक, आर्थिक और सामाजिक क्षति का सामना करना पड़ा है।

“बिल्डर के खिलाफ घर–मालिकों का उभरता संग्राम — दिल्ली में नागरिक आंदोलन की आधिकारिक घोषणा”

इस आंदोलन के केंद्र में हैं Arz Urban Spaces Pvt. Ltd. और इसके CEO प्रलीन चोपड़ा, जिन पर कई गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं – जिनमें देरी से निर्माण, लगातार वादाखिलाफी, खराब कारीगरी, अतिरिक्त भुगतान का दबाव और प्रश्न उठाने पर डराने–धमकाने के आरोप शामिल हैं।

💠 केस 1: खुराना परिवार — 3 साल 6 महीने से अपने ही घर से बाहर W-96, ग्रेटर कैलाश

◾82 वर्षीय मंजीत सिंह खुराना और उनके पुत्र गुरमीत खुराना पिछले 3 साल 6 महीने से किराए के घर में रह रहे हैं

◾उन्हें हर महीने ₹1.75 लाख किराया देना पड़ रहा है, जबकि उनका अपना घर निर्माण देरी के चलते अधूरा है

परिवार का आरोप है कि बिल्डर ने:

◾ तय स्पेसिफिकेशन से पीछे हटकर लाखों रुपये का अतिरिक्त खर्च डाला

◾ काम बेहद निम्न स्तर पर कराया

◾ बार–बार अतिरिक्त भुगतान का दवाब बनाया

◾सवाल उठाने पर झूठी जबरन वसूली व धमकी के आरोप लगाकर चुप कराने की कोशिश की

गुरमीत खुराना का बयान:

“हमने कोई एहसान नहीं मांगा — हमने अपना हक मांगा।

सवाल उठाए तो हमें डराने की कोशिश की गई।

हमारी लड़ाई कानूनी, नैतिक और पूरी ताकत के साथ जारी रहेगी।”

💠 केस 2: 75 वर्षीय वेद गिरधारी — 4 साल से घर के बिना संघर्ष:

निर्माण में लगातार देरी और अधूरे कार्य के कारण वेद गिरधारी लगभग चार वर्षों से अपने ही घर से बाहर रहने पर मजबूर हैं।

उनका गुज़ारा बेटे की ₹80,000 महीने की सैलरी पर होता है, जिसमें से ₹50,000 किराए में चला जाता है — सिर्फ इसलिए कि वे अधूरे घर के करीब रह सकें।

यह मामला उन कई वरिष्ठ नागरिकों की वास्तविकता दर्शाता है, जिनकी पूरी जीवन–पूंजी उनके घर में फँसी हुई है।

💠 केस 3: बंसल परिवार — फर्जी दावा और भुगतान न करने के आरोप:

M-124, ग्रेटर कैलाश

• दिसंबर 2023 में प्रलीन चोपड़ा ने “₹300 करोड़ की कंपनी” और “तेज़ भुगतान” का वादा किया

• परिजनों का आरोप है कि —

◾ भरोसा जीतने के लिए कई प्रॉपर्टीज़ दिखाई

◾ फर्जी ATS (PNB) दी

◾ बिना भुगतान के चाबी और कब्ज़ा देने के लिए दबाव बनाया

◾ साइट पर बैंक अधिकारियों को बुलाने की कोशिश की

तनाव के दौरान विपिन बंसल के बड़े भाई की तबियत बिगड़ने पर मृत्यु हो गई — और परिवार का कहना है कि इस त्रासदी के बीच भी चोपड़ा ने और समय लेने की कोशिश की।

परिवार के अनुसार बिल्डर का कथित कथन:

“मैं जवान हूं, तुम बूढ़े हो। तुम्हारी प्रॉपर्टी 20 साल केस में फँसी रहेगी।”

PNB ने बाद में पुष्टि की कि प्रस्तुत किया गया “सैंक्शन लेटर” कानूनी रूप से मान्य नहीं था।

💠 केस 4: अवनीत सिंह — चाभी मिली पर घर रहने लायक नहीं

3.5 वर्षों के संघर्ष के बाद घर मिला, लेकिन हालत:

• भारी रिसाव

• अधूरा निर्माण

• बेहद खराब कारीगरी

• कई वादों का उल्लंघन

अवनीत सिंह को घर को रहने योग्य बनाने में लाखों रुपये व्यक्तिगत रूप से लगाने पड़े।

💠 “यह सिर्फ एक प्रोजेक्ट का मुद्दा नहीं — यह राष्ट्रीय संकट है”

लगातार मिले सबूतों —

वीडियो रिकॉर्डिंग्स, दस्तावेज़, ऑनलाइन शिकायतें, और प्रत्यक्ष गवाहियों — से खराब निर्माण, मनमानी और डराने का एक पैटर्न सामने आया है। आयोजकों के अनुसार अधिकारियों से कई बार संपर्क किया गया, लेकिन बिल्डर लॉबी के प्रभाव के कारण कार्रवाई अत्यंत धीमी है।

आज आंदोलन के प्रतिनिधियों ने घोषणा की:

 प्रलीन चोपड़ा के खिलाफ संगठित आपराधिक मामला और पुलिस शिकायत दायर की जा रही है।

सिस्टम और सरकार से सीधी अपील:

आंदोलन ने निम्न संस्थानों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है —

🔹 पुलिस एवं कानून लागू करने वाली एजेंसियाँ

🔹 हाउसिंग रेगुलेटरी निकाय

🔹 दिल्ली सरकार

🔹 केंद्र सरकार

🔹 न्यायपालिका

💠 जब आम नागरिक टूट रहे हों — तब सिस्टम का कर्तव्य शक्तिशाली को बचाना नहीं, कमजोर को न्याय दिलाना है।


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